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वाल्मीकि रामायण 83.18

प्रहृष्ट मुदिता सेना सान्वयात् कैकयी सुतम् ।
भ्रातुरानयने यान्तम् भरतम् भ्रातृवत्सलम् ॥२-८३-१८॥

पूरा अध्याय