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वाल्मीकि रामायण 82.7

पित्रा भ्रात्रा च ते दत्तम् राज्यम् निहत कण्टकम् ।
तत् भुन्क्ष्व मुदित अमात्यः क्षिप्रम् एव अभिषेचय ॥२-८२-७॥

पूरा अध्याय