ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 8282.3वाल्मीकि रामायण 82.3सा विद्वज्जनसम्पूर्णा सभा सुरुचिरा तदा । अदृश्यत घनापाये पूर्णचन्द्रेव शर्वरी ॥२-८२-३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय