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वाल्मीकि रामायण 80.21

जाह्नवीम् तु समासाद्य विविध द्रुम काननाम् ।
शीतल अमल पानीयाम् महा मीन समाकुलाम् ॥२-८०-२१॥

पूरा अध्याय