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वाल्मीकि रामायण 77.5

विललाप महा बाहुर् भरतः शोक मूर्चितः ।
शब्द अपिहित कण्ठः च शोधन अर्थम् उपागतः ॥२-७७-५॥

पूरा अध्याय