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वाल्मीकि रामायण 77.26

वर्ष आतप परिक्लिन्नौ पृथग् इन्द्र ध्वजाव् इव ।
अश्रूणि परिमृद्नन्तौ रक्त अक्षौ दीन भाषिणौ ॥२-७७-२६॥

पूरा अध्याय