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वाल्मीकि रामायण 77.14

वर दानमयो अक्षोभ्यो अमज्जयत् शोक सागरः ।
सुकुमारम् च बालम् च सततम् लालितम् त्वया ॥२-७७-१४॥

पूरा अध्याय