ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 7575.45वाल्मीकि रामायण 75.45यद् अग्नि दायके पापम् यत् पापम् गुरु तल्पगे । मित्र द्रोहे च यत् पापम् तत् पापम् प्रतिपद्यताम् ॥२-७५-४५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय