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वाल्मीकि रामायण 74.7

मातृ रूपे मम अमित्रे नृशम्से राज्य कामुके ।
न ते अहम् अभिभाष्यो अस्मि दुर्वृत्ते पति घातिनि ॥२-७४-७॥

पूरा अध्याय