ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 7474.5वाल्मीकि रामायण 74.5यत्त्वया हीदृशम् पापम् कृतम् घोरेण कर्मणा । सर्वलोकप्रियम् हित्वा ममाप्यापादितम् भयम् ॥२-७४-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय