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वाल्मीकि रामायण 74.27

सदाऽप्रतिमवृत्ताया लोकधारणकाम्यया ।
श्रीमत्या गुणनित्यायाः स्वभावपरिचेष्टया ॥२-७४-२७॥

पूरा अध्याय