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वाल्मीकि रामायण 73.16

सो अहम् कथम् इमम् भारम् महा धुर्य समुद्यतम् ।
दम्यो धुरम् इव आसाद्य सहेयम् केन च ओजसा ॥२-७३-१६॥

पूरा अध्याय