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वाल्मीकि रामायण 72.53

त्वत् कृते हि मया सर्वम् इदम् एवम् विधम् कृतम् ।
मा शोकम् मा च सम्तापम् धैर्यमाश्रय पुत्रक ॥२-७२-५३॥

पूरा अध्याय