ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 7272.47वाल्मीकि रामायण 72.47एवमुक्ता तु कैकेयी भरतेन महात्मना । उवाच वचनम् हृष्टा मूढा पण्डितमानिनी ॥२-७२-४७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय