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वाल्मीकि रामायण 72.31

क्व स पाणिः सुख स्पर्शः तातस्य अक्लिष्ट कर्मणः ।
येन माम् रजसा ध्वस्तम् अभीक्ष्णम् परिमार्जति ॥२-७२-३१॥

पूरा अध्याय