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वाल्मीकि रामायण 71.10

स गङ्गाम् प्राग्वट्E तीर्त्वे समायात्कुटिकोष्ठिकाम् ।
सबलस्ताम् स तीर्त्वाथ समायाद्धर्मवर्धनम् ॥२-७१-१०॥

पूरा अध्याय