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वाल्मीकि रामायण 70.10

आत्म कामा सदा चण्डी क्रोधना प्राज्ञ मानिनी ।
अरोगा च अपि कैकेयी माता मे किम् उवाच ह ॥२-७०-१०॥

पूरा अध्याय