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वाल्मीकि रामायण 7.31

मन्थराया वचः श्रुत्वा शयनात्स शुभानना ।
उत्तस्थौ हर्षसंपूर्णा चन्द्रलेखव शारदी ॥२-७-३१॥

पूरा अध्याय