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वाल्मीकि रामायण 7.24

धर्मवादी शठो भर्ता श्लक्ष्णवादी च दारुणः ।
शुद्धभावे न जानीषे तेनैवमतिसन्धिता ॥२-७-२४॥

पूरा अध्याय