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वाल्मीकि रामायण 7.22

तव दुःखेन कैकेयि मम दुःखं महद्भवेत् ।
त्वद्वृद्धौ मम वृद्धिश्च भवेदत्र न संशयः ॥२-७-२२॥

पूरा अध्याय