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वाल्मीकि रामायण 7.12

धात्र्यास्तु वचनं श्रुत्वा कुब्जा क्षिप्रममर्षिता ।
कैलासशिखराकारात्प्रासादादवरोहत ॥२-७-१२॥

पूरा अध्याय