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वाल्मीकि रामायण 69.6

तम् अब्रवीत् प्रिय सखो भरतम् सखिभिर् वृतम् ।
सुहृद्भिः पर्युपासीनः किम् सखे न अनुमोदसे ॥२-६९-६॥

पूरा अध्याय