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वाल्मीकि रामायण 69.20

न पश्यामि भयस्थानम् भयम् चैवोपधारये ।
भ्रष्टश्च स्वरयोगो मे चाया चोपहता मम ॥२-६९-२०॥

पूरा अध्याय