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वाल्मीकि रामायण 69.15

त्वरमाणः च धर्म आत्मा रक्त माल्य अनुलेपनः ।
रथेन खर युक्तेन प्रयातः दक्षिणा मुखः ॥२-६९-१५॥

पूरा अध्याय