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वाल्मीकि रामायण 67.38

स नः समीक्ष्य द्विज वर्य वृत्तम् ।
नृपम् विना राज्यम् अरण्य भूतम् ।कुमारम् इक्ष्वाकु सुतम् वदान्यम् ।त्वम् एव राजानम् इह अभिषिन्चय ॥२-६७-३८॥

पूरा अध्याय