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वाल्मीकि रामायण 67.23

न अराजके जन पदे चरति एक चरः वशी ।
भावयन्न् आत्मना आत्मानम् यत्र सायम् गृहो मुनिः ॥२-६७-२३॥

पूरा अध्याय