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वाल्मीकि रामायण 66.3

सकामा भव कैकेयि भुन्क्ष्व राज्यम् अकण्टकम् ।
त्यक्त्वा राजानम् एक अग्रा नृशम्से दुष्ट चारिणि ॥२-६६-३॥

पूरा अध्याय