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वाल्मीकि रामायण 66.28

गतप्रभा द्यौरिव भास्करम् विना ।
व्यपेतनक्षत्रगणेव शर्वरी ।पुरी बभासे रहिता मह आत्मना ।न च अस्र कण्ठ आकुल मार्ग चत्वरा ॥२-६६-२८॥

पूरा अध्याय