ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 6666.18वाल्मीकि रामायण 66.18हा महाराज रामेण सततम् प्रियवादिना । विहीनाः सत्यसन्धेन किमर्थम् विजहासि नः ॥२-६६-१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय