ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 6565.28वाल्मीकि रामायण 65.28सर्वतः तुमुल आक्रन्दम् परिताप आर्त बान्धवम् । सद्यो निपतित आनन्दम् दीन विक्लव दर्शनम् ॥२-६५-२८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय