Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 65.21

करेणवैव अरण्ये स्थान प्रच्युत यूथपाः ।
तासाम् आक्रन्द शब्देन सहसा उद्गत चेतने ॥२-६५-२१॥

पूरा अध्याय