Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 64.75

अयम् आत्म भवः शोको माम् अनाथम् अचेतनम् ।
सम्सादयति वेगेन यथा कूलम् नदी रयः ॥२-६४-७५॥

पूरा अध्याय