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वाल्मीकि रामायण 64.67

अतः तु किम् दुह्खतरम् यद् अहम् जीवित क्षये ।
न हि पश्यामि धर्मज्ञम् रामम् सत्य पराक्यमम् ॥२-६४-६७॥

पूरा अध्याय