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वाल्मीकि रामायण 64.59

तदेतच्चिन्तयानेन स्मऋतम् पापम् मया स्वयम् ।
तदा बाल्यात्कृतम् देवि शब्दवेध्यनुकर्षिणा ॥२-६४-५९॥

पूरा अध्याय