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वाल्मीकि रामायण 64.55

पुत्र व्यसनजम् दुह्खम् यद् एतन् मम साम्प्रतम् ।
एवम् त्वम् पुत्र शोकेन राजन् कालम् करिष्यसि ॥२-६४-५५॥

पूरा अध्याय