ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 6464.45वाल्मीकि रामायण 64.45गो सहस्र प्रदातृऋणाम् या या गुरुभृताम् अपि । देह न्यास कृताम् या च ताम् गतिम् गच्च पुत्रक ॥२-६४-४५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय