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वाल्मीकि रामायण 64.11

मुनिम् अव्यक्तया वाचा तम् अहम् सज्जमानया ।
हीन व्यन्जनया प्रेक्ष्य भीतः भीतैव अब्रुवम् ॥२-६४-११॥

पूरा अध्याय