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वाल्मीकि रामायण 63.38

तम् देशम् अहम् आगम्य दीन सत्त्वः सुदुर्मनाः ।
अपश्यम् इषुणा तीरे सरय्वाः तापसम् हतम् ॥२-६३-३८॥

पूरा अध्याय