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वाल्मीकि रामायण 63.33

नहम् तथा अनुशोचामि जीवित क्षयम् आत्मनः ।
मातरम् पितरम् च उभाव् अनुशोचामि मद् विधे ॥२-६३-३३॥

पूरा अध्याय