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वाल्मीकि रामायण 63.15

उपास्यहि रसान् भौमाम्स् तप्त्वा च जगद् अम्शुभिः ।
परेत आचरिताम् भीमाम् रविर् आविशते दिशम् ॥२-६३-१५॥

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