ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 5959.15वाल्मीकि रामायण 59.15अप्रहृष्ट मनुष्या च दीन नाग तुरम्गमा । आर्त स्वर परिम्लाना विनिह्श्वसित निह्स्वना ॥२-५९-१५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय