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वाल्मीकि रामायण 58.28

यदि प्रव्राजितः रामः लोभ कारण कारितम् ।
वर दान निमित्तम् वा सर्वथा दुष्कृतम् कृतम् ॥२-५८-२८॥

पूरा अध्याय