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वाल्मीकि रामायण 58.22

वक्तव्यः च महा बाहुर् इक्ष्वाकु कुल नन्दनः ।
पितरम् यौवराज्यस्थो राज्यस्थम् अनुपालय ॥२-५८-२२॥

पूरा अध्याय