ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 5858.18वाल्मीकि रामायण 58.18धर्मनित्या यथाकालमग्न्यगारपरा भव । देवि देवस्य पादौ च देववत् परिपालय ॥२-५८-१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय