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वाल्मीकि रामायण 58.12

आसितम् शयितम् भुक्तम् सूत रामस्य कीर्तय ।
जीविष्याम्यहमेतेन ययातिरिव साधुषु ॥२-५८-१२॥

पूरा अध्याय