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वाल्मीकि रामायण 58.1

प्रत्याश्वस्तः यदा राजा मोहात् प्रत्यागतः पुनः ।
थाजुहाव तम् सूतम् राम वृत्त अन्त कारणात् ॥२-५८-१॥

पूरा अध्याय