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वाल्मीकि रामायण 57.17

सो अवतीर्य रथात् शीघ्रम् राज वेश्म प्रविश्य च ।
कक्ष्याः सप्त अभिचक्राम महा जन समाकुलाः ॥२-५७-१७॥

पूरा अध्याय