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वाल्मीकि रामायण 57.15

वात अयन गतानाम् च स्त्रीणाम् अन्वन्तर आपणम् ।
राम शोक अभितप्तानाम् शुश्राव परिदेवनम् ॥२-५७-१५॥

पूरा अध्याय