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वाल्मीकि रामायण 56.37

अनेक नाना मृग पक्षि सम्कुले ।
विचित्र पुष्प स्तबलैः द्रुमैः युते ।वन उत्तमे व्याल मृग अनुनादिते ।तथा विजह्रुः सुसुखम् जित इन्द्रियाः ॥२-५६-३७॥

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