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वाल्मीकि रामायण 56.14

मनोज्Jनोऽयम् तिरिः सौम्य नानाद्रुमलतायतह् ।
बहुमूलफलो रम्यः स्वाजीवः प्रतिभाति मे ॥२-५६-१४॥

पूरा अध्याय